Why Govt Introduced WAQF Amendment Bill 2025?

लोकसभा में 12 घंटे तक चली लंबी चर्चा के बाद वक्फ संशोधन बिल 2024 पारित हो गया। इस दौरान 288 सांसदों ने बिल के समर्थन में वोट डाला, जबकि 232 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। बिल को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने पेश किया और उन्होंने इसे “उम्मीद” (Unified Waqf Management Empowerment, Efficiency and Development – UMEED) नाम दिया। केंद्र सरकार की सहयोगी पार्टियों टीडीपी, जेडीयू और लोजपा ने इस बिल का समर्थन किया।

1.वक्फ संशोधन बिल क्या हैं? 1950 के दशक में वक्फ संपत्तियों की देखरेख के लिए कानूनी तौर पर एक संस्था बनाने की जरूरत महसूस हुई। इसके लिए 1954 में ‘वक्फ एक्ट’ के नाम से कानून बनाकर ‘सेंट्रल वक्फ काउंसिल’ का प्रावधान किया गया। एक साल बाद यानी 1955 में इस कानून में बदलाव करके हर राज्य में वक्फ बोर्ड बनाए जाने की शुरुआत हुई। इस वक्त देश भर में करीब 32 वक्फ बोर्ड हैं। ये वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन और रखरखाव करते हैं। बिहार समेत कई प्रदेशों में शिया और सुन्नी मुस्लिमों के लिए वक्फ बोर्ड अलग हैं। 1964 में पहली बार सेंट्रल वक्फ काउंसिल गठित हुई। 1954 के इसी कानून में बदलाव करने के लिए केंद्र सरकार ‘वक्फ संशोधन बिल’ लाई है।

2.भारत में वक्फ संपत्तियों का दायरा: भारत में वक्फ बोर्ड के पास रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद सबसे अधिक जमीन है। संपत्ति का प्रकार कुल जमीन (एकड़ में)

 -रेलवे की जमीन 33 लाख
-रक्षा मंत्रालय की जमीन 17 लाख
-वक्फ बोर्ड की जमीन 9.4 लाख वक्फ संपत्तियों की कुल संख्या: अचल संपत्तियां: 8.72 लाख चल संपत्तियां: 16,000 कुल अनुमानित                                                                 कीमत: ₹1.2 लाख करोड़

3.वक्फ संशोधन बिल 2024 के प्रमुख बदलाव: इस कानून में तीन प्रमुख क्षेत्रों में 14 बड़े बदलाव किए गए हैं:

   वक्फ बोर्ड के ढांचे में सुधार: बोर्ड में 2 महिला सदस्य अनिवार्य रूप से शामिल होंगी।

   2 गैर-मुस्लिम सदस्य भी बोर्ड का हिस्सा बनेंगे।

   शिया, सुन्नी, बोहरा और अगखानी मुस्लिम समुदायों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड बनेंगे।

   केंद्र सरकार सेंट्रल वक्फ काउंसिल में 3 सांसदों को नामित करेगी, जो जरूरी नहीं कि मुस्लिम हों।

4.वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण और पारदर्शिता:

    CAG या सरकार द्वारा नियुक्त ऑडिटर वक्फ संपत्तियों का ऑडिट करेंगे।

    राज्य सरकार सर्वे कमिश्नर की जगह अब जिला कलेक्टर को नियुक्त करेगी।

    वक्फ बोर्ड को अपनी सभी संपत्तियां जिला कलेक्टर के ऑफिस में पंजीकृत करनी होंगी।

    अगर कलेक्टर किसी संपत्ति को सरकारी मानता है, तो उसे राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाना होगा और रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजनी होगी।

     जब तक कलेक्टर किसी संपत्ति की जांच पूरी नहीं करता, तब तक वह वक्फ संपत्ति नहीं मानी जाएगी।

     बिना वैध कागजात के कोई भी संपत्ति वक्फ संपत्ति घोषित नहीं की जा सकेगी।

5.वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों का समाधान:

धारा-40 को समाप्त किया गया है, जिससे पहले वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति को अपनी संपत्ति घोषित कर सकता था।

अब वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों को अदालत में चुनौती दी जा सकेगी।

सरकारी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकेगा, चाहे यह नया कानून लागू होने से पहले या बाद में किया गया हो।

6.पुराने और नए वक्फ कानून में 4 बड़े अंतर

कैसा था पुराना वक्फ कानून? सीमित अपील का अधिकार: अगर वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति पर दावा करता था, तो जमीन के असली दावेदार को केवल वक्फ ट्रिब्यूनल में ही अपील करने की अनुमति थी।

                 ट्रिब्यूनल का अंतिम फैसला: वक्फ ट्रिब्यूनल का निर्णय अंतिम माना जाता था, जिसे किसी अन्य कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती थी।

                स्वचालित वक्फ संपत्ति: अगर किसी भूमि पर मस्जिद बनी हो या इस्लामिक उद्देश्य से उपयोग हो रहा हो, तो वह जमीन स्वतः ही वक्फ संपत्ति घोषित हो जाती थी। महिलाओं और गैर-मुस्लिमों की भागीदारी नहीं: वक्फ बोर्ड में केवल मुस्लिम पुरुष ही सदस्य बन सकते थे। महिलाओं और अन्य धर्मों के लोगों के प्रवेश की अनुमति नहीं थी।

7.नए वक्फ बिल में क्या बदलाव होंगे?

न्यायिक अधिकार बढ़े: अब संपत्ति विवादों में ट्रिब्यूनल के अलावा राजस्व न्यायालय, सिविल कोर्ट या हाईकोर्ट में भी अपील की जा सकेगी।

हाईकोर्ट में अपील का अधिकार: वक्फ ट्रिब्यूनल के निर्णय को अब 90 दिनों के भीतर हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी।

दान के बिना वक्फ नहीं: अब कोई संपत्ति वक्फ तभी मानी जाएगी जब उसे दान दिया गया हो, चाहे उस पर मस्जिद ही क्यों न बनी हो।

महिलाओं और अन्य धर्मों की भागीदारी: अब वक्फ बोर्ड में 2 महिलाएं और 2 गैर-मुस्लिम सदस्य भी शामिल किए जाएंगे।

8.सरकार क्यों लायी नया वक्फ कानून?- मोदी सरकार वक्फ बोर्ड एक्ट में 40 से अधिक बदलाव करना चाहती है। इसके पीछे 5 मुख्य कारण हैं

गैर-मुस्लिमों को भी वक्फ बोर्ड में स्थान: अब वक्फ बोर्ड में 2 गैर-मुस्लिम सदस्य और सीईओ भी गैर-मुस्लिम हो सकते हैं।

महिला और अन्य मुस्लिम समुदाय की भागीदारी: 2 महिलाओं को केंद्रीय वक्फ परिषद में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा बोहरा और आगाखानी मुस्लिमों के लिए अलग वक्फ बोर्ड बनाने का प्रस्ताव भी है।

सरकार की निगरानी और पारदर्शिता: वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा। अब CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) के जरिए वक्फ संपत्तियों का ऑडिट होगा।

जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन: अब वक्फ संपत्तियों को राजस्व विभाग में पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। इससे वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व की जांच और रिकॉर्ड पारदर्शी बनाए जा सकेंगे।

न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करना: अब वक्फ ट्रिब्यूनल में 2 सदस्य होंगे और उनके निर्णय को 90 दिनों के अंदर हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी।

 9.बिल के बाद क्या बदलेगा? वर्तमान में अगर वक्फ किसी जमीन को अपनी संपत्ति बताता है, तो दावेदार को खुद साबित करना पड़ता है कि वह संपत्ति उसकी है। नए कानून में इस व्यवस्था को बदला जाएगा, जिससे न्याय की प्रक्रिया और अधिक निष्पक्ष हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *